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सीधा उत्तर · यात्रा के पड़ाव I से

क्या कुछ शून्य से आ सकता है?

पढ़ने का समय: लगभग 2 मिनट

संदर्भ के लिए

यह प्रश्न हर चीज़ की शुरुआत है — इसलिए यह यात्रा का पड़ाव I है। यह कुछ भी मानकर नहीं चलता, इसलिए आप यहीं से शुरुआत कर सकते हैं। आप नीचे शब्द-प्रति-शब्द उत्तर पढ़ सकते हैं, ठीक वैसे ही जैसे वह यात्रा में दिखाई देता है।

अध्याय I से शब्द-प्रति-शब्द
विचार प्रयोग

कल्पना कीजिए कि आप एक बिल्कुल ख़ाली कमरे में एक कुर्सी पर बैठे हैं। अचानक आपके सामने शून्य से एक खिलता हुआ जापानी चेरी का पेड़ प्रकट हो जाता है।

क्या आपको लगता है कि यह संभव है?

बिल्कुल नहीं। यह हमें अस्तित्व के सबसे बुनियादी प्रश्नों में से एक की ओर ले जाता है:

क्या कुछ भी शून्य से उत्पन्न हो सकता है?

उत्तर स्वाभाविक रूप से नहीं है। यदि न पदार्थ हो, न ऊर्जा, न स्थान और न कोई कारण, तो बिल्कुल कुछ भी घटित नहीं हो सकता। क्योंकि शून्य से कुछ नहीं आता। चीज़ें यूँ ही प्रकट नहीं हो जातीं। इसलिए, यदि हमारे चारों ओर दिखने वाली हर चीज़ मौजूद है, जैसे तारे, ग्रह, पेड़ और मनुष्य, तो किसी चीज़ ने उनके अस्तित्व का कारण बना होगा।

लेकिन फिर हमारे ब्रह्मांड का क्या? क्या हम यहाँ भी वही निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि उसे भी किसी और चीज़ ने रचा है? या शायद वह हमेशा से मौजूद था? या शायद वह कारणों की एक अंतहीन शृंखला का हिस्सा है? यह हम अगले भाग में जानेंगे।

यात्रा जारी है · पड़ाव II

क्या ब्रह्मांड स्वयं अपना कारण हो सकता है?

आप पड़ाव I पढ़ चुके हैं। यात्रा ठीक यहीं से जारी है।

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